Monday, 27 November 2017

ये दिन और रात

ना दिन पूरा होता है, उसके लिए जिए बिना,
"जिया"
ना ही रात पूरी होती है, उसकी बाहों में सोए बिना ।

हमसफर

बड़ा लंबा है सफर और तनहा है हम,
"जिया"
ये तनहाई जैसे हमसफर सी हो गई है।

Friday, 9 December 2016

तनहाई

बड़ा लंबा है सफर और तनहा है हम,
"जिया"
ये तनहाई जैसे हमसफर सी हो गई है।

Monday, 7 November 2016

जिंदगी

कभी तेजी से चलती है, कभी ठहर सी जाती है,
कमाल है ये जिंदगी,
"जिया"
रोज नए खेल खिलाती है ।

ये रस्म-ओ-रिवाज़

ना किसी से अपना दु:ख रो सकते हैँ, ना पुरानी बातोँ को याद करके खुश हो सकते हैँ.....
कितने अजीब हैँ ये हालात ये रस्म-ओ-रिवाज़,
"जिया"
जो इक स्री की इच्छाओँ को मार के रख देतेँ हैँ.......

Sunday, 6 November 2016

खुश फहमी या गलती फहमी

कभी तो आएगा वो दिन भी
चाहोगे मुझे जब तुम भी
दुँ क्या नाम इस चाहत को
"जिया"
ये खुश-फहमी हैं या गलत-फहमी।

Saturday, 5 November 2016

डर

खुद ही डाल ली अपने पैरों में अकेलेपन की जंजीरे 
"जिया"
कुछ पाने से पहले अब खो देने का डर रहता है ।